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शुक्रवार व्रत कथा

गोपाल शुक्ल

प्रकाशक : भारतीय साहित्य संग्रह प्रकाशित वर्ष : 2015
पृष्ठ :18
मुखपृष्ठ : ई-पुस्तक
पुस्तक क्रमांक : 9846

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इस व्रत को करने वाला कथा कहते व सुनते समय हाथ में गुड़ व भुने चने रखे, सुनने वाला सन्तोषी माता की जय - सन्तोषी माता की जय बोलता जाये

शुक्रवार के दिन देवी भगवती के संतोषी माता स्वरूप की पूजा एवं व्रत का विधान है, इस व्रत के परिणाम स्वरूप भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं...

शुक्रवार व्रत की विधि, कथा एवं आरती

शुक्रवार व्रत की विधि

इस व्रत को करने वाला कथा कहते व सुनते समय हाथ में गुड़ व भुने चने रखे, सुनने वाला सन्तोषी माता की जय - सन्तोषी माता की जय बोलता जाये। कथा समाप्त होने पर हाथ का गुड़-चना गौ माता को खिला दे। कलश में रखा हुआ गुड़ चना सबको प्रसाद के रूप में बांट दे। कथा से पहले कलश को जल से भरें, उसके ऊपर गुड़-चने से भरा कटोरा रखें। कथा समाप्त होने पर आरती के बाद कलश के जल को घर में सब जगह छिड़कें तथा कुछ जल तुलसी के गमले में डाल दें। व्रत के उद्यापन में पूड़ी, खीर, चने के साग का नैवेद्य रखें। घी का दीपक जलाकर सन्तोषी माता की जय बोलकर नारियल फोड़ें। इस दिन घर में कोई सदस्य खटाई न खायें तथा किसी को खानें भी न दें। इस दिन 8 बालकों को भोजन करायें। घर में यदि बालक कम हों तो कुटुम्ब के या ब्राह्मणों के या पड़ोस के बालकों कों भोजन करायें। उन्हे भोजन में कोई खट्टी वस्तु न दें तथा भोजन के बाद यथा शक्ति दक्षिणा दे।

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